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कुछ कहता हूँ ,कह लेने दो, बात अभी तो बाकी है.

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चाँद-चकोरी रहती है वो , हर अकेली रात में,
‘कब आओगे’ मुझसे मिलने पूछती है हर बात में,
चंचल-चकोर चितवन मेरा, वो बड़ी जज्बाती है.
कुछ कहता हूँ, कह लेने दो, बात अभी तो बाकी है.

घर में है घोर अँधेरा, अंदर गहन उजाला है,
अंदर बैठा चोर कोई, घर के बाहर ताला है.
माटी-माटी खुशबू उसकी, वो तो मेरी साकी है.
कुछ कहता हूँ, कह लेने दो, बात अभी तो बाकी है.

असी मनभ के परिंदो जैसा, एक ही डाल बसेरा है.
कैसा लगता कहती जब वो ‘जो मेरा वो तेरा है.
चल पड़ा है प्रेम-पथिक, प्रेमालाप अभी तो बाकी है.
कुछ कहता हूँ, कह लेने दो, बात अभी तो बाकी है.

वो अपनी है,अपनालो, आवाज़ आई थी किसी कोने से,
जो बीत गई वो बात गई,अब होगा क्या रोने से,
मैं तो भटका राही था, हृदय मेरा संतापी है.
कुछ कहता हूँ, कह लेने दो, बात अभी तो बाकी है.

घटाओं जैसे बाल है उसके, बिजली जैसी उसकी चाल.
मादकभी, मदहोशभी, मोहित हो कर मैं निहाल.
सावन आखिर कब आएगा! बरसात अभी तो बाकी है.
कुछ कहता हूँ, कह लेने दो, बात अभी तो बाकी है.

वो निर्मल गंगा जल जैसी, मैं सागर का खारा पानी हूँ.
गंगा भी मिलती सागर से जाकर, इसलिए तनिक अभिमानी हूँ.
याद आती है जब भी उसकी,आँख मेरी भर आती है.
कुछ कहता हूँ, कह लेने दो, बात अभी तो बाकी है.

love 2Source- newsread.in

Featured Image Source: bonpic.com

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